अमेरिकी क्रांति केवल एक घटना ना होकर पूरी दुनिया के लिए स्वतंत्रता संग्राम का सबक़ क्यूँ बना?कैसे हुई इस क्रांति से नए युग का जन्म?

American Revolution

लोकतंत्र के लिए 1776 में हुई अमेरिकी क्रांति (american revolution) ने विश्व पटल पर एक नया इतिहास रचा ।दुनिया के लिए ये संग्राम इतिहास के उन पन्नो में शामिल हुआ जहाँ इसका स्थान सबसे ऊपर है ।हालाँकि 4 जुलाई को संयुक्त राज्य अमरीका के स्वतंत्रता  दिवस के रूप में मनाया जाता है। लेकिन अमेरिकी क्रांति (american revolution)के फलस्वरूप नई दुनिया में न केवल एक नई सोच के साथ एक नए मजबूत देश का मापदंड तैयार हुआ बल्कि मानव जाति के इतिहास में एक नए युग का भी जन्म हुआ।

स्पेन निवासी कोलंबस द्वारा  1492 ई. में अमेरिका की खोज की गई थी।  विकास की अपार संभावनाओं के कारण इस क्षेत्र विशेष में यूरोपीय देशों की दिलचस्पी बढ़ने लगी।  इसी क्रम में इंग्लैंड ने उतरी अमेरिका में अपने 13 उपनिवेश स्थापित किए। ये विविध उपनिवेश एक मिश्रित संस्कृति का आदर्श प्रस्तुत कर रहे थे  जिसमें ब्रिटेन,फ्रांस, जर्मनी, पोलैंड, पुर्तगाल आदि देशों के भूमिहीन किसान,धार्मिक स्वतंत्रता के आकांक्षी, व्यापारी विचौलिये आदि जाकर बस गए थे। 

दरअसल भौगोलिक दृष्टि से अमेरिका का उत्तरी भाग मत्स्य पालन और मध्यवर्ती भाग शराब और चीनी उधोग के लिए तथा दक्षिण भाग कृषि कार्य के लिए विकसित क्षेत्र था। यहाँ अँग्रेज़ जमींदारों के अधीन बड़े- बड़े कृषि फार्म थे जिसमें अफ्रीकी गुलामों की सहायता से खेती की जाती थी।

अमेरिकी क्रांति (american revolution)का विश्व इतिहास में महत्वपूर्ण स्थान है। इसी संग्राम के साथ ही यूरोप में क्रांतियों की एक कड़ी आरम्भ हो गई। इस क्रांति ने पहली बार विश्व के समक्ष जनतांत्रिक शासन प्रणाली का उदाहरण रखा, साथ ही इसने विश्व को प्रथम लिखित संविधान भी दिया।

अमेरिकी क्रांति (american revolution)
अमेरिकी क्रांति (american revolution)

क्या थे वो कारण जिससे अमेरिकी क्रांति का बीज पनपा?

ब्रिटेन कैसे करता था राज ?

 उपनिवेशों में शासन का संचालन गवर्नर  और उसकी कार्यकारणी समिति के अधीन विधानसभा द्वारा होता था। गवर्नर ब्रिटिश सरकार के प्रत्यक्ष प्रतिनिधि के रूप में कार्य करता था।  गवर्नर की नियुक्ति ब्रिटिश सत्ता द्वारा होती थी एवं उसकी कार्यकारणी समिति में ब्रिटिश ताज द्वारा मनोनीत सदस्य होते थे जबकि विधानसभा का गठन विशिष्ट मतदाताओं द्वारा निवार्चन के फलस्वरूप होता था, जो मुख्य रूप से स्थानीय विषयों से संबंधित कानून के निर्माण के साथ -साथ कर भी लगाती थी। अंततः इस शासन व्यवस्था में अंतिम और निर्णायक नियंत्रण ब्रिटिश सत्ता का ही होता था तथा ब्रिटिश सत्ता के हितों को ही प्राथमिकता  दी जाती थी।

जॉर्ज तृतीय का निरकुंश शासन 

 तत्कालीन ब्रिटिश सम्राट जॉर्ज तृतीय  (1760 -1820 ) के निरकुंश शासन ने भी  विद्रोह को बढावा दिया।  मंत्रिमंडल की  अनदेखी कर वह अपना व्यक्तिगत शासन चलाता था। उसने उपनिवेशों  के प्रति द्वेषपूर्ण  नीति अपनाई।  अनेक क़ानूनों द्वारा जॉर्ज तृतीय  ने उपनिवेशों पर प्रतिबंध  लगाने का प्रयास किया। सम्राट के इन नीतियों की तीखी प्रतिक्रिया उपनिवेशों में हुई। इससे आक्रोश बढ़ा और विद्रोह की भावना बलवती हुई।

सप्तवर्षीय युद्ध का प्रभाव

1756-63ई. के बीच कनाडा स्थित फ्रांसीसी उपनिवेशों के प्रश्न को लेकर फ्रांस और इंग्लैंड के मध्य युद्ध चला जिसमें इंग्लैंड विजयी रहा और इन उपनिवेशों पर इंग्लैंड का अधिकार हो गया।  इसका परिणाम यह हुआ कि फ्रांस के रूप में प्रबल शत्रु और जर्जर अर्थव्यवस्था इंग्लैंड को मिली। इंग्लैंड ने जब  युद्ध खर्च पूरा करने के लिए आर्थिक कानूनों को कठोर किया गया तो असंतोष भड़क उठा।

इसके अतिरिक्त फ्रांस की पराजय से अमेरिकी उपनिवेशों का खतरा भी समाप्त हो गया जिसके परिणामस्वरूप स्वतंत्रता की भावना बलवती हुई और इंग्लैंड पर सुरक्षा निर्भरता कम हुई।  इसलिए कहा जाता है कि सप्तवर्षीय युद्ध में इंग्लैंड की विजय से ही अमेरिका का इतिहास आरंभ होता है।

 स्वतंत्रता की भावना से ओत प्रोत अमेरिकी उपनिवेश

 अमेरिका वासियों को स्वतंत्रता चेतना विरासत में  ही यूरोपीय राष्ट्रों  से प्राप्त हुई थी। व्यवहारिक रूप में भी वह स्वतंत्रता का उपभोग कर रह थे क्योंकि गवर्नर की सत्ता सीमित  थी। जब इस स्वतंत्रता को सीमित  करने का प्रयास किया गया तो ब्रिटिश शासन के विरुद्ध अमेरिकी उपनिवेश लामबंद हो गए।

दोषपूर्ण शासन व्यवस्था

 औपनिवेशिक शासन को नियंत्रित करने के लिये ब्रिटिश सरकार गवर्नर  की नियुक्ति करती थी।  गवर्नर  की सहायता के लिये गठित कार्यकारिणी समिति   के सदस्यों का चयन ब्रिटिश ताज द्वारा किया जाता था।  किंतु  कानून बनाने, कर लगाने,वेतन-भत्ते  तय करने का अधिकार चुनी हुई स्थानीय विधायिका को था और उसके निर्णयों को स्वीकार या अस्वीकार करने की शक्ति गवर्नर को प्राप्त थी।  इस प्रकार अंतिम अधिकारिता को लेकर उपनिवेशों में असंतोष था।

ब्रिटिश सत्ता के नियंत्रण से बहार अमेरिकी उपनिवेश

ब्रिटिश अपने अंदरूनी विवादों के कारण आरंभिक काल में अमेरिकी उपनिवेशों में पर्याप्त ध्यान नहीं दे सका।  जब अमेरिकी उपनिवेश स्वच्छंदता के सुख से परिचित थे तो परवर्ती काल में वह क्यों ब्रिटिश नियंत्रण के प्रयासों को स्वीकार करते ? इस तरह नियंत्रणकारी गतिविधियों ने विस्फोटक वातावरण के निर्माण में सहयोग किया।

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इंग्लैंड की सामाजिक  व्यवस्था से उत्तपन आक्रोश

सामाजिक संरचना में अंतर

 इंग्लैंड और उपनिवेशों की सामाजिक संरचना में मूलभूत अंतर था। इंग्लैंड में सामंतवादी व्यवस्था एवं कुलीनों का प्रभाव था। इसके विपरीत अमेरिका में समानता की भावना एवं जनतांत्रिक मूल्यों को अधिक महत्व दिया था। 

अमेरिका में मध्यवर्ग का उदय

 क्रांति (Revolution) का आरम्भ होने से पूर्व ही अमेरिका में एक सशक्त मध्यवर्ग का उदय हो चुका था। इसके अंतर्गत शिक्षित एवं धनी व्यक्ति थे। वे स्वतंत्र और प्रगतिशील विचारों के थे। उससे सैनिक क्षमता एवं रणकुशलता भी थी। वे उपनिवेशों के शोषण और राजनीतिक अधिकारों से वंचित किए जाने से  रुष्ट होकर स्वतंत्रता एवं समानता की भावना का प्रचार कर रहे थे |

स्वतंत्रता एवं आत्मविश्वास की भावना

 उपनिवेशवासी स्वतंत्र प्रवृत्ति के थे। उनमें से अधिकांश इंग्लैंड से आकर बसे थे। उन्हे ये बात अजीब लगती थी कि इंग्लैंड वालो को जो नागरिक अधिकार एवं स्वतंत्रता प्राप्त थी। उनसे उपनिवेशवासियों को वंचित रखा गया था। इससे उनमें असंतोष कि भावना का विकास हुआ।

इंग्लैंड और उपनिवेशों में धार्मिक मतभेद

इंग्लैंड में एंग्लिकन संप्रदाय  एवं चर्च का व्यापक प्रभाव था। इसके विपरीत उपनिवेशवासी  प्यूरिटन मत के पोषक थे और एंग्लिकनों को घृणा को दृष्टि से देखते थे। धार्मिक अधिकारों से क्षुब्ध होकर प्यूरिटन संप्रदाय के लोगों में  इंग्लैंड  के विरुद्ध विरोध की भावना बढ़ी अत: वे इंग्लैंड से स्वतंत्र होने के लिए  व्यग्र हो गए।

इंग्लैंड और अमेरिका के मध्य  भौगोलिक स्थिति

अमेरिकी क्रांति (American Revolution) को भौगोलिक दूरी ने भी प्रभावित किया। अमेरिका और इंग्लैंड हजारों मील कि दूरी पर अटलांटिक महासागर के दो किनारों पर अवस्तिथ थे। इंग्लैंड और अमेरिका के मध्य भौगोलिक दूरी इतनी अधिक थी कि कोई नित्य सम्पर्क होने की संभावनाएं नहीं थी। इस भौगोलिक और सामाजिक पृथक्कीकरण ने स्वातंत्र्य चेतना को जागृत किया।

शिक्षा के  उच्च स्तर का होना

बौद्धिक चेतना अमेरिकी उपनिवेशों में शिक्षा व जागरूकता का स्तर अन्य उपनिवेशों से बेहतर था। यहाँ पर अनेक विश्वविधालय तथा संस्थाएं कार्यरत थीं।  पत्र-पत्रिकाओं का प्रसार व प्रबोधन के विचारों की लोकप्रियता ने अमेरिका को बौद्धिक चेतना से लबरेज कर दिया था।टॉमस पेन,एडमण्ड बक्र (ब्रिटिश) भी इंग्लैंड के  अमेरिका के नियंत्रण को अनुचित बता रहे थे।  वही अमेरिका ओटिस, सेम्युअल  एडम्स, बेजामिन फ्रेंकलिन जैसे नेतृत्वकर्ता अमेरिका जनता को स्वतंत्रता के पक्ष में और शोषण के विरुद्ध प्रेरित कर रहे थे।

उपनिवेशों की दयनीय आर्थिक स्थिति

अमेरिकी क्रांति के लिए आर्थिक मामलों में ब्रिटेन की औपनिवेशिक नीति काफी हद तक जिम्मेदार रही।ब्रिटेन द्वारा स्वहित को विशेष प्राथमिकता दी गई था उपनिवेश के हितों की पूर्णत: अनदेखी की गई। 1651 ई. में ‘नेविगेशन एक्ट’ के तहत उपनिवेशों को व्यापार करने हेतु ब्रिटेन और आयरलैंड के अतिरिक्त किसी दूसरे देश के जहाजों के प्रयोग पर प्रतिबंध लगा दिया गया। व्यापारिक अधिनियम के तहत प्रावधान था कि इन उपनिवेशों में उत्पादित होने वाले कपास, चीनी,एवं तंबाकू का निर्यात सिर्फ ब्रिटेन को ही किया जा सकता था |

 दूसरे शब्दों में,यह व्यवस्था उपनिवेशों के हितों के विपरीत ब्रिटेन के हितों में कही ज़्यादा थी। इस आड़ में इन वस्तुओ की कीमत कम-से-कम मूल्य पर निर्धारित की जाती थी जो कि अन्यायपूर्ण था। इसके अतिरिक्त ब्रिटेन में निर्मित सामान या तो बिना तटकर या अत्यंत ही कम तटकर चुका कर उपनिवेशों में उतारा जाता था जबकि अन्य देशों के सामान पर भारी तटकर लगाया जाता था।

उपनिवेश कि जनता को इससे भी भारी परेशानी होती थी। इतना ही नहीं, इन उपनिवेशों को सूती वस्त्र एवं लोहा   स्थापित  करने कि पूर्ण रूप से मनाही थी तथा इस आवश्यकता  की पूर्ति ब्रिटेन से आयातित वस्तुओं द्वारा ही की जाती थी। फलत: इस  कारण से ब्रिटेन में औधौगिक क्रांति (Indusrial Revolution) को जबर्दस्त बढ़ावा मिला और यही स्थिति अमेरिका के  दृष्टिकोण से  उपनिवेशों के लिए  अभिशप्त बनी |

देशभक्तों के आंदोलनों ने अमेरिकी क्रांति की पृष्ठभूमि तैयार कर दी ।

स्टांप एक्ट

 स्टांप एक्ट के तहत उपनिवेश के  सभी सरकारी दस्तावेज़ों एवं कानूनी पत्रों पर सरकार द्वारा निर्धारित  शुल्क का स्टांप लगाना अनिवार्य कर दिया था। वास्तव में उपनिवेश की जनता इतनी जागरूक एवं स्वतंत्र प्रिय हो गई थी कि उसने इस ब्रिटिश कानून को अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप माना तथा ऐसा कानून जिसके निर्माण में उपनिवेशवासियों कि कोई भूमिका नहीं थी।अपने निर्णायक अधिकार जाने के लिए अमेरिकी क्रांति(american revolution) के क्रांतिकारियों ने “प्रतिनिधित्व नहीं तो कर नहीं “का प्रसिद्ध नारा दिया। अंतत: उपनिवेशवासियों के प्रबल विरोध के कारण स्टांप एक्ट शीघ्र ही समाप्त होगा था। परन्तु उपनिवेशवासियों में तीव्र रोष उत्पन्न हो गया था।

आयात कर एक्ट

अमेरीका में घृणित आयात कर एक्ट अधिनियम अस्तित्व में आया। अमेरिकी क्रांति (American Revolution) की पृष्ठभूमि निर्माण में इसकी सशक्त भूमिका  रही। नए आयात कर अधिनियम के तहत उपनिवेश में आने वाली उपभोक्ता वस्तुएं जैसे चाय,कागज़,शीशा आदि पर तटकर लगाया गया। हालांकि व्यापक जन विरोध के दवाब में आकर ब्रिटिश सत्ता द्वारा आयात कर अधिनियम वापस ले लिया गया लेकिन चाय पर यह अधिनियम सरकार द्वारा बनाए रखा गया तटकर का उद्देश्य ब्रिटिश सत्ता द्वारा उपनिवेशों में सांकेतिक रूप से अपनी सर्वोच्चता साबित करना था, जिसे उपनिवेश की जनता किसी भी स्थिति में स्वीकार करने को तैयार नहीं थी |

‘बोस्टन चाय पार्टी ‘-(Boston Tea Party )

चाय एक्ट  के तहत ‘बोस्टन चाय पार्टी’ की घटना को जन्म दिया जिसमे चाय से लदे ब्रिटिश जहाज  को उपनिवेशों द्वारा उतारने से इंकार कर दिया गया। ग़ौरतलब है कि 1773 के ‘चाय एक्ट’ के तहत अमेरिकी उपनिवेशों में चाय की आपूर्ति का एकमात्र अधिकार ब्रिटिश ईस्ट-इंडिया कंपनी के ज़िम्मे आ गया था। उपनिवेश की जनता ने इसे अपना राष्ट्रीय अपमान समझकर विरोध प्रदर्शन किया  तथा ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध बोस्टन बंदरगाह पर चाय से लदे जहाज़ में भीषण तबाही मचाई। इस घटना के उपरान्त अमेरिकी स्वतंत्रता हेतु व्यापक कदम उठाए गए। उपनिवेशों एवं ब्रिटेन के मध्य यह स्थिति युद्ध में बदल गई।

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अमेरिका की आज़ादी के बाद हुई नए युग की शुरुआत ।

अमेरिकी क्रांति 1781 ई. (american revolution)के युद्ध की समाप्ति के बाद 13 स्वतंत्र राज्य ने संघ की स्थापना की तथा एक संघीय संविधान को स्वीकार किया। यह संविधान का पहला लिखित संविधान था। अमेरिका संविधान में ‘बिल ऑफ राइट्स’ (अधिकार संबंधी नियम )का प्रावधान किया गया जिसके अन्तगर्त अमेरिकी नागरिकों को भाषण,प्रेस,धर्म की स्वतंत्रता,कानून के समक्ष समानता आदि जैसे आवश्यक अधिकार प्रदान किए गए |

अमेरिकी क्रांति (American Revolution) की व्यापक सफलता के बाद विश्व राजनीति में संयुक्त राज्य अमेरिका के नाम से एक शक्ति अस्तित्व में आई।

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भारत में अमेरिकी क्रांति का प्रभाव क्या रहा?

भारत पर अमेरिकी क्रांति(American Revolution) का तत्कालीन प्रभाव प्रतिकूल रहा था । भारत में साम्राज्यवाद में वृद्धि हुई उसके साथ ही इस संग्राम ने राष्ट्रवादियों को क्रांति की सशक्त प्रेरणा प्रदान दी।अमेरिकी क्रांति(American Revolution) के दौरान शुरू हुआ हालाँकि 1775 ई. से 1783 तक लड़ा गया तथा युद्ध की समाप्ति 1783 की पेरिस संधि के साथ हुई थी। इसने अभिनव राजनीतिक परिवर्तनों की एक ऐसी  शृंखला को जन्म दिया जिसका दायरा केवल अमेरिका तक सीमित न होकर वैश्विक बन गया।ये कहना ग़लत नहीं होगा की अमेरिकी क्रांति ने न केवल अमेरिकी राजनीति को प्रभावित किया बल्कि विश्व स्तर पर स्वतंत्रता, एकता एवं समानता का प्रसार भी किया।

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