दुनिया का इतिहास को जानने से पहले हमे पुनर्जागरण क्यों जाना चाहिए

Renaissance

पुर्नजागरण(Renaissance) का सम्बंध “पुर्नजन्म ” से भी जोड़ा जाता है ।14वी और 17 वीं सदी के बीच यूरोप में जो सांस्कृतिक व धार्मिक प्रगति हुए आंदोलन और युद्ध ने एक नए युग को जन्म दिया जिसे पुर्नजागरण कहा जाता है। इन धर्म युद्धों के फलस्वरूप ही जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में नवीन चेतना आई।

यूरोप में मध्यकाल की समाप्ति और आधुनिक युग का प्रारंभ इसी समय से माना जाता है ।दरअसल पुर्नजागरण की शुरुआत इटली के फ्लोरंस नगर में हुई थी और पुर्नजागरण के जनक इटली के महान कवि दाँते (1260-1321ईसवीं ) को कहा जाता है ।

यह वह स्थिति थी, जब विभिन्न यूरोपीय देशों ने एक लम्बी अवधि के उपरांत मध्यकाल के अंधकार युग को त्याग कर आधुनिक युग में दस्तक दी थी।इस प्रकार यह उस बौद्धिकता का नाम हैं, जिसने रोम और यूनान की प्राचीन सभ्यता को एक नई दिशा प्रदान कीऔर नई चेतना को जन्म दिया।

16वीं सदी तक इसका प्रसार विभिन्न यूरोपियो देशों जैसे जर्मनी और ब्रिटेन तक इसका खूब प्रसार हुआ।इनसे प्रयोगवाद और धर्मवाद के स्थान पर मानवतावाद को प्रतिष्ठित किया। पश्चिम के राष्ट्र मध्ययुग से निकल कर आधुनिक युग के विचार और जीवन शैली अपनाने लगे।

Renaissance


विदेश व्यापार का केंद्र


इटली की भौगोलिक स्थिति भूमध्य सागरीय देशों में सबसे अनुकूल स्थिति में मौजूद थी |अरब और एशिया के व्यापारियों के जरिये लाया गया माल, अधिकांश इटली में ही बिकता था। यहीं से एशिया की वस्तुएं यूरोपीय देशों में व्यापार के लिए जाया करती थी ।जिससे इटली एक प्रसिद्ध व्यापारिक केंद्र के रूप में प्रसिद्ध हुआ।इस विदेशी व्यापार से इटली में समृद्ध मध्यवर्ग का उदय हुआ, यहाँ मध्यवर्ग धर्म की उपेक्षा करने लगा।

समृद्ध नगरों की स्थापना


इटली विदेशी व्यापारियों की गतिविधियों का प्रमुख केंद्र होने से नेपल्स,फ्लोरंस ,मिलान,वेनिस जैसे समृद्ध नगरों की स्थापना हुई। जिससे इन नगरों में निवास करने वाले लोगों के रहन-सहन ,खान -पान,सभ्यता और संस्कृति उच्च कोटि की हुई।जिसने पुर्नजागरण की प्रेरणा दी।

मध्यवर्ग में नई सोच का समावेश

इटली व्यापार का प्रमुख केंद्र होने के कारण समृद्ध मध्यम वर्ग का उदय हुआ। यहाँ व्यापारी वर्ग इतना शक्तिशाली हो गया कि उसने सामंतों एवं पोप की परवाह नहीं की और मध्यकालीन मान्यताओं को नहीं माना ।इससे इटली में पुर्नजागरण के नवीन सोच का संचार हुआ |

इटली प्राचीन रोमन सभ्यता का जन्म स्थल क्यों माना जाता हैं ?


इटली के नगरों में मौजूदा प्राचीन सभ्यता के बहुत से स्मारक अभी भी लोगों को पुराने वैभव की याद दिलाते थे ।प्राचीन रोम सभ्यता की जड़े अभी भी महसूस होती थी ।अपने देश को पुनःगौरवशाली बनाने का विचार लोगों के मन में छाया हुआ था। इसी विचार ने इटली को पुर्नजागरण(Renaissance) का केंद्र बिंदु बना दिया।


विद्वानों का इटली में आश्रय लेना

यूरोप के प्रवेश द्वार कुस्तुन्तुनिया पर 1453 ई . में तुर्को के अधिकार हो जाने के कारण यूनानी विद्वान ,कलाकर और व्यापारी इटली आकर बस गये। यह विद्वान अपने साथ प्राचीन यूनानी साहित्य भी साथ लेकर के आये। इनमें निहित ज्ञान से यूरोप अभी अनभिज्ञ था।इस साहित्य के अतुल ज्ञान विज्ञान एवं विचार ने यूरोप को जागृत कर दिया ।

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शिक्षा के विस्तार से परिवर्तन


मध्ययुग में शिक्षा मज़हब से प्रभावित व केन्द्रित थी ।इटली में व्यापार और आर्थिक समृद्धि के कारण शिक्षा के नये स्वरूप की आवश्यकता हुई ।इसमें भौगोलिक ज्ञान,व्यावसायिक ज्ञान, विज्ञान,मानव के उपयोगी तथा तर्क युक्त विषयों को समुचित स्थान दिया गया। ऐसी शिक्षा ने इटली में पुर्नजागरण का आधार बना दिया।

धार्मिक जीवन में बदलाव


बौद्धिक पुर्नजागरण (Renaissance) का लोगों के धार्मिक जीवन पर तात्कालिक प्रभाव पड़ा।कैथोलिक धर्म में व्याप्त अराजकता एवं कुरीतियों की ओर जनता का ध्यान आकर्षित हुआ। देशी भाषायों में बाइबिल का अनुवाद हो जाने के कारण अब उसकी पहुँच आम जन तक हो गई।

इस प्रकार आम लोगों में भी धर्म के वास्तविक स्वरूप को समझने में सक्षम हो गए। धार्मिक अंधविश्वास दूर होने लगे और इससे धर्म सुधार को बहुत बल मिला। इस प्रकार यह कहना अतिशयोक्तिपूर्ण न होगा की धर्म सुधार आंदोलन पुर्नजागरण का ही प्रतिफल था।


माइकल एंजलो एक इतालवी मूर्तिकार,चित्रकार ,वास्तुकार और उच्च पुर्नजागरण(Renaissance) युग के कवि थे। जो फ्लोरंस गणराज्य में पैदा हुआ थे।उन्होंने पश्चिम कला के विकास पर एक विशेष प्रभाव डाला।

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पुर्नजागरण के परिणाम


पुर्नजागरण ने साहित्य ,कला एवं विज्ञान ही नहीं बल्कि मानव जीवन के हर पहलू को प्रभावित किया ।इससे धार्मिक कट्टरता का प्रभाव कम हुआ और विज्ञान को बढ़ावा मिला । धर्म और पोप की सत्ता कमजोर पड़ने लगी और लोगों में राष्ट्रीयता की भावना विकसित होने लगी।


निष्कर्ष

स्पष्ट है की पुर्नजागरण(Renaissance) से प्राचीन प्रेरणाओं पर आधारित एक नया प्रयोग शुरू हुआ। जिसमे सामंजस्य एवं मौलिकता मौजूद थी। मनुष्य के सामाजिक मूल्य की पुन: प्रतिष्ठा शरू हुई।वास्तव में पुर्नजागरण एक संधिकाल था। जिसमे प्राचीन एवं आधुनिक काल दोनों की विशेषताएं मौजूद थीं।धार्मिक संकीर्णता की पकड़ से मानव मुक्त होने लगा।

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4 thoughts on “दुनिया का इतिहास को जानने से पहले हमे पुनर्जागरण क्यों जाना चाहिए”

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