bastar ki anokhi hari gufa | बस्तर की अनोखी हरी गुफा

bastar ki anokhi hari gufa ki jankari jyadatar sirf waha ke gramino ko hi hai .

Bastar Ki Anokhi Hari Gufa | बस्तर की अनोखी हरी गुफा

Bastar Ki Anokhi Hari Gufa | बस्तर की अनोखी हरी गुफा

बस्तर जिले के दक्षिण पूर्व में 200 वर्ग किलोमीटर इलाके में फैली हुयी बस्तर की अनोखी हरी गुफा ( bastar ki anokhi hari gufa )हरियाली की चादर ओढ़ी हुई समान प्रतीत होती है ।यह गुफा कोटमसर से कुछ ही दूरी पर स्थित है। गुफा में सूर्य की किरणें ज्यादा समय के लिए नहीं पड़ती है जिससे यहां सेटेलीक्टाइड की प्राकतिक संरचना पर काई नुमा हरे शैवाल उग आए हैं, जिससे उन पर हरा रंग चढ़ाया मालुम पड़ता है। यहाँ की जैव विविधता, सर्वश्रेष्ठ प्राणवायु की गुणवत्ता, वन औषधियों की बहुतायत, जंगली जीव जन्तुओ और जलप्रपात एवं भू गर्भिय गुफाओ के चलते वर्ष 1982 में इस वन क्षेत्र को राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा दिया गया।जिसे कांगेर घाटी राष्ट्रिय उद्यान कहा जाता है ।

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बस्तर की अनोखी हरी गुफा(bastar ki anokhi hari gufa ) का इलाक़ा एशिया के सर्वश्रेष्ठ प्राणवायु वाले इलाके के लिए भी जाना जाता है। कांगेर घाटी के पहाड़ों में स्थित कैलाश और कोटमसर गुफा देश विदेश के सैलानियों और भू गर्भ शास्त्रियों के लिए वर्षों से कौतुहल का विषय रही हैं। इन दोनों ही गुफाओं में स्टेलेगटाइट और स्टेलेगमाइट की शुभ्र चट्टानें बहुतायत में मौजूद हैं लेकिन इसी घाटी के बीहड़ों में अब एक ऐसी गुफा प्रकाश में आयी है जो हरीतिमा लिए हुवे स्टेलेगटाइट और स्टेलेगमाइट की वजह से अन्य सभी गुफाओं से अलग अपना विशेष महत्त्व रखती है।

” दण्डक दल ” ने गुफा विज्ञानियों के दल के साथ इस बस्तर की अनोखी हरी गुफा के रहस्य को जानने की कोशिश की गुफा के मुहाने से लगभग 35 मीटर की सीधी ढलान के पथरीले रास्ते पर हमारी टीम ने प्रवेश किया और उसके बाद हमे जो कुछ देखने को मिला वो बाहरी दुनिया से एकदम अलग था। गुफा में कई सुरंग नुमा तंग रास्ते मौजूद मिले और ऐसा बहुत कुछ जो पृथ्वी के ऊपर मौजूद नहीं । गुफा के अन्दर बड़ी संख्या में स्टेलेगटाइट और स्टेलेगमाइट की चमकदार चट्टानें हैं जो किसी फानूस की तरह छत से लटकीं और सतह पर भी मौजूद हैं।

यहाँ कई सुरंगनुमा तंग रस्ते हैं जिनमे प्रवेश करना बहुत मुश्किल है। बस्तर की अनोखी ”हरी गुफा” के नीची कई सुरंगें यहाँ मौजूद हैं। और सबसे बड़ा आकर्षण किसी ऐरावत हांथी की तरह आकृति लिए हुवे सामने मौजूद 20 फिट से भी ऊँची स्टेलेग टाइट की हरी चट्टान है जिसे देख ऐसा लगता है मानो किसी ने पूरी की पूरी चट्टान की हरे रंग में रंग दी हो। प्रकाश पड़ते ही इन चट्टानों का सौंदर्य और भी अधिक निखर जाता है।

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बस्तर दर्शन के एक रिपोर्ट के अनुसार गुफा विज्ञानी जयंत विश्वास बताते है कि चट्रटान का हरा रंग यहाँ मौजूद नमी और दोपहर बाद थोड़ी देर के लिए चट्टान पर पड़ने वाला सूर्य के प्रकाश का प्रभाव है। वैज्ञानिकों के अनुसार नमी और सूर्य के प्रकाश की वजह से चट्टान पर शैवाल उग आये हैं जिनका रंग हरा है।

Bastar Ki Anokhi Hari Gufa | बस्तर की अनोखी हरी गुफा
हरी गुफा

बस्तर भूषण की रिपोर्ट की माने तो बस्तर की कांगेर घाटी में अनेकों ऐसे रहस्यमयी स्थल है जिससे आज की दुनिया पुरी तरह अनजान है। कांगेर घाटी की कोटमसर गुफा विश्व प्रसिद्ध है वहीं ऐसी अनेको और भी गुफायें है जिसकी जानकारी सिर्फ वहां के ग्रामीणों को ही है। कांगेर घाटी में एक अन्य गुफा हाल के कुछ सालों में प्रकाश में आयी है । कोटमसर से लगभग 7 किलोमीटर की दुरी पर घने जंगलों में स्थित इस गुफा का पहुंच मार्ग सिर्फ ग्रामीणों को ही मालूम है। गुफा का प्रवेश मार्ग भले ही सकरा है किन्तु अंदर कोटमसर गुफा की तरह विशाल कक्ष मौजूद है।

इस गुफा के प्रथम कक्ष में छतों से लटकते स्टेग्लेटाइट के नमीयुक्त पत्थरों पर सूरज का प्रकाश पड़ता है और नमीयुक्त चट्टानों पर शैवाल उग आते हैं। इन्हीं शैवालों की वजह से ये चट्टानें हरी दिखाई पड़ती हैं। हरी गुफा की सबसे बड़ी खासियत इसका हरा होना तो है ही इसके अलावा ये बस्तर की एकमात्र ऐसी गुफा है जहां दोपहर बाद कुछ देर के लिए सूरज की रौशनी अंदर आती है। इस गुफा को अभी आम पर्यटकों के लिए नहीं खोला गया है।

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