कविता

राजशाही

कविता राजशाही के इस जाल में बच्चा,बूढ़ा,नवजवान हर कोई भागीदार है। जिस कुर्शी पर तुम बैठे हो  वहाँ तक हमने तुम्हें सिड़ी बनकर पहुँचाया है। तुम पर विश्वास नहीं अटूट विश्वास है, लोकतंत्र जिसका नाम है। भारत के इतिहास के पन्नो में ,वीरों के धैर्य, शौहाद्र, संविधान का ज़िक्र दिखता है। जहाँ न्याय और अन्याय के …

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